गुरुवार, 19 जनवरी 2017

पांडिचेरी यात्रा (7 to 10 January,2016)



            मैं  रोज की तरह अपने ऑफिस में बैठा था की दिल्ली से एक घनिष्ठ मित्र का फ़ोन आया। वो कहने लगे की पांडिचेरी चलना है। क्योंकि आप का पहले कोई प्लान नहीं है तो एकदम प्रतिक्रिया देना बड़ा मुश्किल है। उन्होंने बोला की अन्नामलाई यूनिवर्सिटी में थोड़ा काम है और उसके बाद 2-3 दिन घूम आएंगे। मैंने कहा मैं आपको सोच के बताता हूँ। मैंने शाम को उसे बोला कि ठीक है चलते हैं। इस प्रकार  उसने दिल्ली से चेन्नई की हवाई जहाज से आने जाने की टिकटें बुक कर दी। पांडिचेरी के बजाय चेन्नई की टिकेट हमें दो हज़ार रुपये काम में मिल रही थी यानि के आठ हज़ार की बचत। तय ये हुआ की हम चेन्नई में नहीं रुकेंगे सीधा पॉन्डिचेरी पहुंचेंगे। ये सब इसलिए की थोड़े समय में सब जगह तो घूम नहीं सकते कम से कम एक स्थान तो दो दिन में आराम से घुमा जा सकता है। सात मार्च को 13:20 की इंडिगो एयरवेज की फ्लाइट से हमें दिल्ली से जाना था। मैं शैलेन्द्र सिंह के पास छह मार्च को दिल्ली चला गया। तय समयानुसार हम दोनों एयरपोर्ट में दाखिल हुए तथा फ्लाइट में बैठ गए। यहाँ एक बात ओर ये मेरी पहली हवाई यात्रा थी। इसलिए खासकर मुझे जिज्ञासा थी की जहाज़ बैठने के बाद कैसा लगता है। हुआ तो कुछ नहीं लेकिन विंडो सीट मिलने से धरती की वस्तुओं को निहारना अच्छा लगा। तय समयानुसार हम 16:10 पे चेन्नई पहुंचे। अब एयरपोर्ट से निकल कर गिण्डी बस अड्डे पहुंचने के लिए ऑटो ले लिया। गिण्डी बस अड्डा लगबग 7-8 किलोमीटर है। पांडिचेरी की बस पकड़ने के लिए  ये स्थान सबसे उपयुक्त है। गिण्डी बस अड्डे पे पहुँच कर हमने डोसा खाया तथा बस के बारे में जानकारी लेने लगे। हमें एक टोम्पो ट्रैवेलर वाला मिला। उसने बताया की वो पांडिचेरी जा रहा है। हमारे लिए इससे अच्छा क्या हो सकता था उसपे टंग लिए। अब ये लगभग शाम के छह बजे का वक़्त था। चेन्नई से पांडिचेरी की दुरी लगभग 155-160 किलोमीटर है यानि के 3 घंटे कम से कम। पांडिचेरी के लिए दो रस्ते हैं एक वाया ईस्टर्न कोस्ट रोड (155 कि. मी.)जो की महाबलीपुरम ,कडलूर वगैरह हो कर निकालता है तथा दूसरा NH 32 (170 कि. मी.) है। हम पहलेवाले से जा रहे थे। अब चूँकि अँधेरा भी होने लगा था इसलिए हम ने भी झपकी लेना उचित समझा। गाडी में हमारे साथ तीन चार लोग और थे जो की रस्ते में ही उतर चुके थे।साढ़े आठ बजे हम पांडिचेरी बस अड्डे पहुँच गए।
          अब हमने रात में रुकने के लिए होटल ढूंढने लगे। जब कोई होटल ठीक सा नहीं जमा तो ओयो होटल्स  वालों से संपर्क किया। इंदिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के पास होटल तमीज़ह पार्क में ओयो रूम 1100 रुपये में मिल गया जिसमें नास्ता फ्री। तीन रात के लिए बुक किया तथा खा पी के सो गए। 8 मार्च सुबह  हमें अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के  लिए निकलना था जो की चिदाम्बरम में है।  चिदाम्बरम पांडिचेरी से 62 किलोमीटर है। नास्ता करने के बाद हम बस अड्डे पहुंचे। सबसे पहली समस्या यहाँ आकर हुई वो ये की बस काउंटर्स तथा बसों में लगे बोर्ड सभी तमिल भाषा में लिखे हुए। पूछने पर काफी लोगों ने कुछ नहीं बताया। शायद वो इंग्लिश नहीं जानते होंगे। वैसे हम लोग जैसा मानते हैं तमिल वालों की इंग्लिश इतनी अच्छी भी नहीं है। खैर जैसे तैसे हमने बस पकड़ी ग्यारह बजे तक चिदाम्बरम पहुँच गए। वहां यूनिवर्सिटी का काम निबटने में शाम हो गई जिसमें सबसे बड़ा योगदान वहां के लंच ब्रेक का है जो की दो घंटे चलता है। सभी कर्मचारियों में बड़ी एकरूपता है की लंच करके सभी लोग जमीं पे अपनी कुर्सी के पास सो जाते हैं। आदमी औरत कोई भी हो सभी गहरी नींद में मस्त। हमने भी वो दो घंटे चाय पी के गुजारे क्योंकि वहां खाने पिने की ओर कोई व्यवस्था नहीं है। शाम को 5 बजे निकले और बस पकड़ कर 8 बजे वापिस अपने होटल में आराम फ़रमाया।  
                 अब हमारे पास 9 मार्च घूमने के लिए पूरा दिन था। कैसे कैसे घूम जाये ये हमने रात में सोच लिया था। घूमने के लिए सबसे अच्छा  साधन है मोटर साइकिल/स्कूटर। होटल के रेसेप्शन पे बात की तो उन्होंने ही एक्टिवा स्कूटर का इंतेजाम करवा दिया। 24 घंटे के लिए 200 रुपये दिए तथा तेल अपना डलवाया। स्कूटर वाले ने बोला की अगर कहीं पुलिस तंग करे बेशक स्कूटर उन्हें दे देना हम अपने आप ले आएंगे। क्योंकि हेलमेट नहीं था न। 9 मार्च को सुबह नास्ता किया स्कूटर उठाया ,चल दिए पांडिचेरी को खंगालने। सबसे पहले रुख किया पैराडाइस बीच का। रास्ते में शहर के लैंडमार्क याद रखते हुए घूमने लगे ताकि बार बार रास्ता ना पूछना पड़े। नारियल पीते रहे गर्मी का खुमार उतरता रहा। नोननकुप्पम से पैराडाइस बीच के लिए किस्ती से जाया जाता है।
        Whether it is a couple of hours or the entire day Paradise Beach is a must do during your trip to Pondichhery . It is located just 8 KMs from the town along the Cuddalore main road. This Beach can be accessed only from the Chunnamber Resort via boats. The timming for this is from 09:00 to 17:00 Hrs only. This pristine beach is meticulously taken care of and offers a host of benefits from food to beverages to showers and restrooms,all just a few meters away. Swimming is permitted close to the shore only, as current can be strong further in.
      हमने भी स्कूटर पार्क किया 200 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से 2 टिकेट लेकर किस्ती में जा बैठे। थोड़ी ही देर में किस्ती की सवारियां पूरी हो गयी तथा वह समुद्र में चल पड़ी। 2 कि मी के बाद हम बीच पैराडाइस पहुँच गए। यह बीच बहुत सूंदर तथा भीड़भाड़ रहित है। एकदम शांत जगह, समुन्दर का पानी बिलकुल साफ़ नीले रंग का। यह बीच टापूनुमा है जिसे के तीन ओर समुन्दर तथा चौथे तरफ नारियल के पेड़ों का जंगल। वहां हमारा सिर्फ 1 घंटा बिताने का प्रोग्राम था लेकिन उस जगह की भव्यता में ऐसे खो गए की जब समय पे नजर दौड़ाई तो चार घंटे बीत चुके थे । इसका खामियाजा भी भुक्तान पड़ा। इस मजे के चक्कर में म्यूजियम छूट गया क्योंकि वो पांच बजे बंद हो जाता है। वापसी की किस्ती पकड़ी तथा स्कूटर उठा कर शहर की तरफ चल पड़े। बोटेनिकल गार्डन ,चर्च ,अरबिंदो आश्रम अदि घूमने के बाद थोड़ी थकान मिटने के लिए चाय पानी लिया। अब शाम हो चुकी थी। आठ बजे तक बीच पर घूम के फोटोग्राफी करते रहे और उसके बाद होटल में जा के सो गए।
          अगले दिन रात आठ बजे की चेन्नई से फ्लाइट थी सो पुरे दिन कुछ देखने के लिए हमारे पास था। सुबह सात बजे यहाँ से चेन्नई के लिए बस से निकल पढ़े। प्लान ये था कि चेन्नई में घूमेंगे। लेकिन रास्ते में प्रोग्राम में तबदीली करी के चेन्नई के बजाये हम मामल्लापुरम जिसे महाबलीपुरम भी कहा जाता है में घूमेंगे। अब बस वाले से बोला की हमें महाबलीपुरम उतार दीजिये। वहां बाईपास पे उतरते ही ऑटो पकड़ा तथा महाबलीपुरम के मंदिर (शोर टेम्पल) पहुँच गए। मंदिरों का शहर महाबलीपुरम तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई से 60किमी. दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है। प्रांरभ में इस शहर को मामल्लापुरम कहा जाता था। तमिलनाडु का यह प्राचीन शहर अपने भव्य मंदिरों, स्थापत्य और सागर-तटों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। सातवीं शताब्दी में यह शहर पल्लव राजाओं की राजधानी था। महाबलिपुरम के तट मन्दिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में माना जाता है जिसका संबंध आठवीं शताब्दी से है। यह मंदिर द्रविड वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। यहां तीन मंदिर हैं। बीच में भगवान विष्णु का मंदिर है जिसके दोनों तरफ से शिव मंदिर हैं। मंदिर से टकराती सागर की लहरें एक अनोखा दृश्य उपस्थित करती हैं। यहाँ ग्यारह बजे से दो बजे तक रुकने के दुबारा बाईपास आ कर दोबारा बस पकड़ी। यहाँ से 14 किमी. दूर चैन्नई- महाबलिपुरम रोड़ पर क्रोकोडाइल बैंक स्थित है। इसे 1976 में अमेरिका के रोमुलस विटेकर ने स्थापित किया था। स्थापना के 15 साल बाद यहां मगरमच्छों की संख्या 15 से 5000 हो गई थी। इसके नजदीक ही सांपों का एक फार्म है। यहाँ हर प्रकार के  सांप हैं तथा उनके बारे में जानकारी दी जाती है। आप किसी भी सांप को निकलवा के उसके बारे में हर जानकारी ले सकते हैं। इस प्रकार हमने काफी ज्ञानवर्धक तथा लुत्फभरी यात्रा का समापन किया।

Shailender & Me in Flight

Newspaper in my room

Pondicherry Bus Stand

Lunch time in Annamalai University Chidamabram

Going to Paradise Beach

Paradise Beach

Botanical Garden

Botanical Garden

Church in Pondy

Rock Beach

Temple in a Village

Shore Temple

Shore Temple

Shore Temple

Shore Temple

Shore Temple

Mahabalipuram Beach

Murti Banana Sikhte Hue

Corrocodile Bank

Corrocodile Bank








4 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  3. Detailed description of that trip have reminded me every moment.Will be very useful to our other friends visiting there.

    जवाब देंहटाएं
  4. Detailed description of that trip have reminded me every moment.Will be very useful to our other friends visiting there.

    जवाब देंहटाएं